नई दिल्ली में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को प्रधानमंत्री ने सम्बोधित किया...

नई दिल्ली में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को प्रधानमंत्री ने सम्बोधित किया...

नई दिल्ली में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को प्रधानमंत्री ने सम्बोधित किया...

मंच पर विराजमान दिल्ली की लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी, केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी जी, श्रीमती सावित्री ठाकुर जी, राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन श्रीमती विजया राहतकर जी, यहां आप सबके बीच भी कई वरिष्ठ लोग बैठे हैं, सांसद हैं, विधायक हैं, हमारी लोकसभा की पूर्व स्पीकर आदरणीय मीरा कुमार जी भी हमारे बीच है। यहां उपस्थित सभी मेरी सम्मानित बहनें, इस समय देश में बैसाखी के पर्व की उमंग है। कल देश के अलग-अलग हिस्सों में नव वर्ष भी मनाया जाएगा। मैं आज जलियावाला बाग नरसंहार के वीर बलिदानियों को भी श्रद्धांजलि देता हूं।

साथियों,

देश की विकास यात्रा के इन अहम पड़ावों के बीच भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक निर्णय लेने जा रहा है। मैं बहुत जिम्मेवारी के साथ कह रहा हूं, कि 21वीं सदी के महत्वपूर्ण निर्णयों में एक महत्वपूर्ण निर्णय यह है। ये निर्णय नारीशक्ति को समर्पित है, नारीशक्ति वंदन को समर्पित है। हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। एक ऐसा नया इतिहास जो अतीत की संकल्पनाओं को साकार करेगा, जो भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा। एक ऐसे भारत का संकल्प जो समता मूलक हो, जहां सामाजिक न्याय केवल एक नारा न हो, लेकिन हमारी कार्य संस्कृति का, हमारे work culture का, हमारी निर्णय प्रक्रिया का, स्वाभाविक हिस्सा हो।

साथियों,

राज्यों की विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक, दशकों की प्रतिक्षा के अंत का समय 16-17-18 है। 2023 में नई संसद में जो नया भवन निर्माण हुआ, उसमें हमने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में प्रथम कदम उठाया था। वह समय से लागू हो सके, महिलाओं की भागीदारी हमारे लोकतंत्र को मजबूती दे, इसके लिए 16 अप्रैल से संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक का आयोजन होने जा रहा है। और उसके पहले आज नारी शक्ति वंदन का ये कार्यक्रम, मैं इसके लिए, इस कार्यक्रम के जरिये हमें देश की कोटि-कोटि माता-बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है। और मैं इस कार्यक्रम में आपको कोई उपदेश देने नहीं आया हूं, न ही मैं आपको जगाने आया हूं। मैं आज आया हूं आप सबके, देश की कोटि-कोटि माताओं-बहनों के आशीर्वाद लेने के लिए। आप सभी देश के कोने-कोने से आई हैं1 मैं आपकी इस उपस्थिति के लिए, इस महत्वपूर्ण काम के लिए आपने जो समय निकाला है, इसके लिए आपका हृदय से अभिनंदन करता हूं। साथ ही भारत की सभी महिलाओं को, एक नए युग के आगमन की बधाई भी देता हूं।

साथियों,

लोकतांत्रिक संरचना में महिलाओं को आरक्षण देने की जरूरत दशकों से हर कोई महसूस कर रहा था, चर्चा भी होती थी। इस विमर्श को करीब-करीब 4 दशक बीत गए, 40 साल बीत गए। इसमें सभी पार्टियों के और कितनी ही पीढ़ियों के प्रयास शामिल हैं। हर दल ने इस विचार को अपने-अपने ढंग से आगे बढ़ाया है। 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम आया था, तब भी सभी दलों ने सर्वसम्मति से इसे पास कराया था। और तब एक सुर में ये बात भी उठी थी कि इसे हर हाल में 2029 तक लागू हो जाना चाहिए। ये बात सबने कही थी, कानून पारित हो लेकिन लागू न हो, ये सदन में किसी को मंजूर नहीं था, और खासकर के हमारे विपक्ष के सभी साथियों ने मुखर होकर के इस बात पर जोर डाला था कि 2029 में ये लागू होना चाहिए। 2029 की समय सीमा को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने, क्योंकि विपक्ष ने जो बात रखी थी, हमारे लिए वो बात भी गंभीर होती है और इसलिए हम लगातार विचार-विमर्श करते रहे, मंथन करते रहे, नए-नए रास्ते खोजते रहे, संविधान की जिनको ज्यादा अध्ययन है, ऐसे लोगों की भी सलाह ली। और 16 अप्रैल से संसद में इसी पर व्यापक चर्चा भी होने जा रही है।

साथियों,

हमारा प्रयास है, और हमारी प्राथमिकता भी है, इस बार भी, ये काम संवाद, सहयोग और सहभागिता से हो। और मुझे पूरा विश्वास है कि जिस प्रकार से इस अधिनियम को पारित किया गया था और संसद का, सदन का गौरव बढ़ा था, इस बार भी सबके सामूहिक प्रयास से संसद की गरिमा और नई ऊंचाईयों को छुएगी। देश की हर नारी को भी अच्छा लगेगा कि हर दल ने राजनीति से ऊपर उठकर उनके हित में ये महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, काम किया है। वैसे मैं देख रहा हूँ, बीते कुछ दिनों से देश भर में महिलाएं मुखर होकर इस विषय पर बात कर रही हैं। व्यापक रूप से डिबेट चल रहा है और लोकतंत्र की एक बहुत बड़ी तकात है। विधानसभा और लोकसभा पहुँचने के उनके सपनों को, आप सबके सपनों को नए पंख मिलने जा रहे हैं। मैं अनुभव कर रहा हूं, देश में एक सकारात्मक माहौल बना है।

साथियों,

आज़ादी की लड़ाई से लेकर संविधान सभा के निर्णयों तक, स्वतंत्र भारत की नींव रखने में भारत की नारीशक्ति ने असीमित योगदान दिया है, इतिहास गवाह है। और आज़ादी के बाद भी जिन महिलाओं को प्रतिनिधित्व का मौका मिला, उन्होंने देश के लिए बहुत शानदार काम किया है। हमारे देश में राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक, महिलाएं जहां भी रहीं हैं, उन्होंने अपनी अलग लेगसी बनाई है। इस समय भी हमारे देश में राष्ट्रपति जी से लेकर वित्त मंत्री तक, ऐसे अहम पद महिलाएं ही संभाल रहीं हैं। उन्होंने देश की गरिमा और गौरव, दोनों को बढ़ाया है।

साथियों,

हमारे देश में महिला नेतृत्व का एक बेहतरीन उदाहरण  पंचायती राज संस्थाएं भी हैं। आज भारत में 14 लाख से अधिक महिलाएं लोकल गवर्नमेंट बॉडीज में सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। लगभग 21 राज्यों में तो पंचायतों में उनकी भागीदारी करीब-करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। और मैं जब विदेश के मेहमानों से कभी इस विषय पर बात करता हूं, ये आंकड़ा सुनते उनका मुहं खुला रह जाता है, उनको आश्चर्य होता है।

साथियों,

ये कोई साधारण बात नहीं है। लाखों महिलाओं की राजनीति और सामाजिक जीवन में ये सक्रियता, दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं और राजनीतिक विशेषज्ञों को भी बहुत ही हैरान करने वाली बात होती है। और इससे पूरे भारत का बहुत गौरव बढ़ता है।